षड्दर्शन
शब्दावली
अन्य नाम: छह दर्शन, षड्दर्शनानि
षड्दर्शन का अर्थ है छह दर्शन — सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदान्त। परम्परा से इनके प्रणेता क्रमशः कपिल, पतंजलि, गौतम, कणाद, जैमिनि और बादरायण माने जाते हैं। वेद को प्रमाण मानने के कारण इन्हें "आस्तिक" दर्शन कहा जाता है, जबकि चार्वाक, बौद्ध और जैन दर्शन वेद को प्रमाण न मानने से "नास्तिक" कहे जाते हैं।
प्रत्येक दर्शन का आधार एक सूत्र-ग्रंथ है। सूत्र-शैली में गिने-चुने शब्दों में सिद्धान्त का सार रखा जाता है, इसीलिए इन पर विस्तृत भाष्य और टीकाएँ लिखी गईं। ये दर्शन प्रायः तीन जोड़ों में पढ़े जाते हैं — सांख्य-योग, न्याय-वैशेषिक और मीमांसा-वेदान्त।
प्रमाण-विचार, सृष्टि-मीमांसा और मोक्ष-साधना इनके सामान्य विषय हैं। सभी किसी न किसी रूप में आत्मा और पुनर्जन्म को मानते हैं। न्याय, योग और वेदान्त ईश्वर में विश्वास करते हैं, जबकि सांख्य और मीमांसा को परम्परा में निरीश्वरवादी कहा जाता है। छह को एक साथ "षड्दर्शन" कहने की सूची मध्यकाल में प्रचलित हुई।
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स्रोत: प्रस्थानभेद