लव
रामायण एवं रामचरितमानस
लव राम और सीता के जुड़वाँ पुत्रों में कनिष्ठ थे। सीता ने वाल्मीकि आश्रम में उन्हें जन्म दिया; वाल्मीकि ने 'लव' नाम रखा और दोनों भाइयों को शिक्षा-दीक्षा दी। लव और कुश ने वाल्मीकि से रामायण कंठस्थ की और उसे दूर-दूर तक गाकर सुनाया।
अश्वमेध यज्ञ में लव-कुश के रामायण-गान से राम ने अपने पुत्रों को पहचाना। परंपरा के अनुसार इन्होंने यज्ञ का घोड़ा पकड़कर राम के भाइयों की सेना को पराजित भी किया, तब सीता ने आकर पिता-पुत्र का मिलन कराया।
राम के बाद लव को उत्तर कोसल का राज्य मिला और उन्होंने श्रावस्ती को राजधानी बनाया। उनके नाम से बसा नगर लवपुरी भी जाना जाता है।
नाते-रिश्ते
- पिता: राम
- माता: सीता
- जुड़वाँ भाई: कुश
- गुरु: वाल्मीकि
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – उत्तरकाण्ड