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तैत्तिरीय उपनिषद 2.1.1

रोज़ का श्लोक

अन्य नाम: सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म

ब्रह्मसत्यज्ञान

अर्थ — ब्रह्म सत्य है, ज्ञान है और अनन्त है।

यह तैत्तिरीय उपनिषद का ब्रह्म-लक्षण वाक्य है। ब्रह्म को सत्-चित्-आनन्द के रूप में परिभाषित करने वाले इन तीन शब्दों में सम्पूर्ण वेदांत समाया है।

श्लोक

सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म।

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स्रोत: तैत्तिरीय उपनिषद