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तैत्तिरीय उपनिषद 1.11.1

रोज़ का श्लोक

अन्य नाम: सत्यं वद धर्मं चर

सत्यधर्मशिक्षा

अर्थ — सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो और स्वाध्याय से कभी प्रमाद (लापरवाही) मत करो।

तैत्तिरीय उपनिषद के शिक्षावल्ली का यह वाक्य गुरु द्वारा शिष्य को दिया गया अंतिम उपदेश है। यह विद्यार्थी-जीवन के तीन आधार-स्तम्भ बताता है — सत्य, धर्म और स्वाध्याय।

श्लोक

सत्यं वद। धर्मं चर। स्वाध्यायान्मा प्रमदः।

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स्रोत: तैत्तिरीय उपनिषद