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श्वेताश्वतर उपनिषद 6.11

रोज़ का श्लोक

ईश्वरसर्वव्यापीनिर्गुण

अर्थ — एक ही देव सब प्राणियों में गूढ़ रूप से स्थित है, सर्वव्यापी है और सब भूतों का अंतरात्मा है। वह कर्मों का अध्यक्ष, सबका आधार, साक्षी, चेतन, केवल और निर्गुण है।

श्वेताश्वतर उपनिषद का यह मंत्र ईश्वर की सर्वव्यापकता और साक्षी-भाव को दर्शाता है। वह एक होकर भी सबमें व्याप्त है — यही एकेश्वरवाद का मर्म है।

श्लोक

एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा। कर्माध्यक्षः सर्वभूताधिवासः साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्च॥

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