शिक्षा (वेदांग)
ग्रंथ
अन्य नाम: शिक्षा वेदांग, वेदांग शिक्षा
रचयिता / कर्ता: परंपरागत आचार्य (पाणिनीय, नारदीय आदि शिक्षा-ग्रंथ)
शिक्षा छह वेदांगों में से पहला वेदांग है। इसका कार्य वेद-मंत्रों के वर्ण, स्वर, मात्रा और उच्चारण की शुद्धता को सुरक्षित रखना है।
शिक्षा-ग्रंथों में वर्णों के उच्चारण-स्थान (कंठ, तालु, मूर्धा आदि), स्वर (उदात्त, अनुदात्त, स्वरित) और पाठ-दोषों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
पाणिनीय शिक्षा और नारदीय शिक्षा इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं। यह वेदांग वैदिक मंत्रों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी शुद्ध रूप में सुरक्षित रखने का साधन रहा।
यह वेदांग-साहित्य का भाग होने से इसे वेद-पुरुष का अंग माना जाता है। इसके बिना वैदिक पाठ की शुद्धता संभव नहीं मानी जाती।
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स्रोत: पाणिनीय शिक्षा एवं नारदीय शिक्षा