श्रीरंगम
तीर्थ एवं स्थान
अन्य नाम: श्रीरंगम, रंगनाथस्वामी
श्रीरंगम तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली के निकट, कावेरी और कोल्लिडम (कावेरी की शाखा) नदियों से घिरे द्वीप पर स्थित है। यहाँ विष्णु के शयन-रूप रंगनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है।
महात्व: यह 108 दिव्य देशमों में प्रथम और प्रमुख माना जाता है तथा स्वयंव्यक्त क्षेत्रों में गिना जाता है। मंदिर सात प्राकारों (सप्त-प्राकार) वाला विशाल परिसर है, जो लगभग 156 एकड़ में फैला है और इसे संसार का सबसे बड़ा कार्यरत हिंदू मंदिर-परिसर कहा जाता है। चोल, पांड्य, होयसल, विजयनगर और नायक राजाओं ने इसके विस्तार में योगदान दिया।
कथा: रंगनाथ की मूर्ति को 'रंग विमान' से यहाँ आया माना जाता है; विभीषण इस मूर्ति को लंका ले जा रहे थे, पर कावेरी-तट पर रखते ही वह वहीं स्थिर हो गई — इसी स्थान पर मंदिर बना। इसीलिए मूर्ति का मुख दक्षिण (लंका) की ओर है।
महात्व: वैकुंठ एकादशी तथा रंगनाथ की रथ-यात्रा (आदि ब्रह्मोत्सव) यहाँ के प्रमुख उत्सव हैं। श्री वैष्णव परंपरा में श्रीरंगम का विशेष स्थान है।
संबंधित
स्रोत: स्कन्द पुराण; श्री वैष्णव परंपरा