मदुरै
तीर्थ एवं स्थान
अन्य नाम: मदुरै, मधुरा
मदुरै तमिलनाडु में वैगई नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। यह प्राचीन पांड्य राज्य की राजधानी थी और तमिल संगम-परंपरा का केंद्र रहा। यहाँ मीनाक्षी (पार्वती) और सुंदरेश्वर (शिव) का विशाल मंदिर है।
कथा: कथा है कि पांड्य राजा मलयध्वज ने पुत्र-प्राप्ति के लिए यज्ञ किया, पर पुत्री मीनाक्षी का जन्म हुआ जिसके तीन स्तन थे। भविष्यवाणी थी कि सच्चे स्वामी से मिलने पर तीसरा स्तन गिर जाएगा। मीनाक्षी योद्धा बनीं; कैलाश की ओर बढ़ते समय शिव से मिलीं और तीसरा स्तन गिर गया। फिर विष्णु ने उनका विवाह शिव से कराया और दोनों मदुरै के राजा-रानी बने।
महात्व: मीनाक्षी मंदिर द्रविड़ स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें 14 गोपुरम और 'सहस्र-स्तंभ' मंडप हैं। मीनाक्षी-तिरुकल्याणम् उत्सव (चैत्र) यहाँ भव्य रूप से मनाया जाता है। मदुरै को शक्ति-उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
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स्रोत: स्कन्द पुराण; तिरुविलैयाडल परंपरा