वाल्मीकि
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: आदिकवि, रत्नाकर, आदिकवि वाल्मीकि
वाल्मीकि 'आदिकवि' हैं; रामायण के रचयिता और संस्कृत के प्रथम महाकाव्यकार। पूर्व-जीवन में वे 'रत्नाकर' नाम के डाकू थे, जो नारद या सप्तर्षियों के उपदेश से साधक बने और 'राम' नाम का जाप करते हुए वल्मीक (दीमक के ढेर) से ढँक गए, तब 'वाल्मीकि' कहलाए।
तमसा नदी के तट पर क्रौंच पक्षी के वध से उनके हृदय में करुणा उमड़ी और वाणी से प्रथम श्लोक फूटा। इसी अनुष्टुप छंद में उन्होंने रामायण की रचना की।
उत्तरकाण्ड में सीता ने उनके आश्रम में शरण ली और वहीं लव-कुश को जन्म दिया। वाल्मीकि ने लव-कुश को रामायण सिखाई; अश्वमेध यज्ञ में उन्होंने पुत्रों के मुख से राम-चरित सुनाया।
नाते-रिश्ते
- शिष्य: लव, कुश
- उपदेशक: नारद
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
पूर्वजन्म में रत्नाकर (डाकू) थे; राम-नाम जप से ब्रह्मर्षि बने
प्रसिद्ध कथन
प्रथम श्लोक (क्रौंच-वध पर): "मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः। यत्क्रौंचमिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥" (वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड)
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड (सर्ग २), उत्तरकाण्ड