सिंहिका
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: सिंहिका राक्षसी
सिंहिका समुद्र में रहने वाली एक मायावी राक्षसी थी। उसकी विशेषता यह थी कि वह आकाश में उड़ते प्राणियों की छाया पकड़कर उन्हें निगल जाती थी।
रामायण में वर्णित सिंहिका दिति की संतान बताई जाती है, जिसका विवाह दानव विप्रचित्ति से हुआ और जिससे राहु आदि पुत्र उत्पन्न हुए। वह लंका के निकट समुद्र में निवास करती थी।
जब हनुमान सीता की खोज में लंका जा रहे थे, तब सिंहिका ने उनकी छाया पकड़ ली। हनुमान ने उसे पहचान लिया, विशाल रूप धारण करके उसके मुख में प्रवेश किया और अपने तीखे नखों से उसका हृदय चीरकर बाहर निकल आए, जिससे उसका वध हो गया। यह हनुमान के समुद्र-लंघन का चौथा अद्भुत कार्य माना जाता है।
नाते-रिश्ते
- पति: विप्रचित्ति
- संतान: राहु आदि
- वधकर्ता: हनुमान
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – सुन्दरकाण्ड