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शांकर भाष्य (उपनिषद)

ग्रंथ

अन्य नाम: उपनिषद् भाष्य, शांकर उपनिषद् भाष्य, दशोपनिषद् भाष्य

रचयिता / कर्ता: आदि शंकराचार्य

अद्वैत वेदांतउपनिषदभाष्य

यह आदि शंकराचार्य द्वारा मुख्य उपनिषदों पर रचित भाष्य-समूह है। शंकराचार्य ने लगभग दस प्रमुख उपनिषदों — ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुंडक, मांडूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय, छांदोग्य और बृहदारण्यक — पर भाष्य लिखा।

वे अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक आचार्य हैं। इन भाष्यों में उन्होंने उपनिषदों के महावाक्यों के आधार पर ब्रह्म और आत्मा की अभिन्नता स्थापित की।

भाष्य का दृष्टिकोण यह है कि तत्त्वमसि और अहं ब्रह्मास्मि जैसे महावाक्य जीव और ब्रह्म की एकता बताते हैं; जगत् माया के कारण भिन्न प्रतीत होता है। ये भाष्य अद्वैत वेदांत की मूल आधारशिला हैं और आगे की समस्त वेदांत-व्याख्या इन्हीं पर टिकी है।

प्रसिद्ध कथन

सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म। (तैत्तिरीय उपनिषद)
तत्त्वमसि। (छांदोग्य उपनिषद)

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स्रोत: उपनिषद् भाष्य