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उपनिषद

शब्दावली

अन्य नाम: उपनिषद, वेदांत, ज्ञान-कांड

ब्रह्मआत्मावेदांतदर्शन

उपनिषद वेदों के अंतिम भाग हैं, इसीलिए इन्हें 'वेदांत' कहा जाता है। ये ब्रह्म, आत्मा और जगत के स्वरूप पर केंद्रित ज्ञान-ग्रंथ हैं।

शास्त्रीय आधार: प्रमुख उपनिषद हैं — ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य और बृहदारण्यक (दस या तेरह मुख्य)। इनका मूल सूत्र है 'तत् त्वम् असि', 'अहं ब्रह्मास्मि' तथा 'अयम् आत्मा ब्रह्म'।

विस्तृत अर्थ: उपनिषदों का सार ब्रह्म-विद्या है — आत्मा और ब्रह्म की एकता, जगत की माया, और ज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति। आदि शंकराचार्य ने इन पर अद्वैत भाष्य लिखा; रामानुज और मध्व ने भी भाष्य किए।

उदाहरण: बृहदारण्यक में याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद, तथा छान्दोग्य में उद्दालक-श्वेतकेतु संवाद और 'सत्यमेव जयते' की उक्ति।

प्रसिद्ध कथन

'सत्यमेव जयते नानृतम्।' — सत्य की ही जय होती है, असत्य की नहीं। (मुण्डक उपनिषद 3.1.6)
'असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय।' — असत्य से सत्य, अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमृत की ओर ले चलो। (बृहदारण्यक उपनिषद 1.3.28)

संबंधित

चार वेदवेदांगमोक्षमायाभगवद्गीतास्मृति

स्रोत: बृहदारण्यक, छान्दोग्य, मुण्डक उपनिषद