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रामानुज श्रीभाष्य

ग्रंथ

अन्य नाम: श्री भाष्य, श्रीभाष्य, ब्रह्मसूत्र श्रीभाष्य

रचयिता / कर्ता: रामानुजाचार्य

विशिष्टाद्वैतब्रह्मसूत्रभाष्य

यह ब्रह्मसूत्र पर रामानुजाचार्य द्वारा रचित भाष्य है, जिसे श्री भाष्य कहा जाता है। ब्रह्मसूत्र बादरायण का सूत्र-ग्रंथ है, जो वेदांत का आधार है।

रामानुजाचार्य विशिष्टाद्वैत वेदांत संप्रदाय के प्रवर्तक आचार्य हैं। उनके अनुसार ब्रह्म (विष्णु अथवा नारायण) सगुण है, जगत् और जीव उसके शरीर हैं, और जीव ब्रह्म से भिन्न तथा अभिन्न दोनों हैं।

भाष्य में ब्रह्म की सगुणता, जीव की दासता, भक्ति और प्रपत्ति (शरणागति) का निरूपण है। श्री भाष्य विशिष्टाद्वैत संप्रदाय का मूल ग्रंथ है और भक्ति-वेदांत की दिशा निर्धारित करता है।

प्रसिद्ध कथन

जन्माद्यस्य यतः। (ब्रह्मसूत्र १.१.२)
(भावानुवाद) ब्रह्म ही जगत् का उपादान एवं निमित्त कारण है, और चित् तथा अचित् उसके शरीररूप हैं।

संबंधित

ब्रह्मसूत्रवेदांतउपनिषदशांकर भाष्य (ब्रह्मसूत्र)मध्व भाष्य

स्रोत: श्री भाष्य