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शांकर भाष्य (ब्रह्मसूत्र)

ग्रंथ

अन्य नाम: शारीरक भाष्य, ब्रह्मसूत्र भाष्य, शांकर ब्रह्मसूत्र भाष्य

रचयिता / कर्ता: आदि शंकराचार्य

अद्वैत वेदांतब्रह्मसूत्रभाष्य

यह ब्रह्मसूत्र (वेदांतसूत्र) पर आदि शंकराचार्य का भाष्य है, जिसे शारीरक भाष्य भी कहा जाता है। ब्रह्मसूत्र बादरायण द्वारा रचित सूत्र-ग्रंथ है, जिसमें उपनिषदों के वेदांत-सिद्धांत संक्षेप में निबद्ध हैं।

शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के प्रमुख आचार्य हैं, और यह भाष्य अद्वैत संप्रदाय का केंद्रीय ग्रंथ है। इसमें वे स्पष्ट करते हैं कि ब्रह्म ही जगत् का कारण है और ब्रह्म तथा आत्मा एक हैं।

भाष्य में ब्रह्म का स्वरूप, जगत् की मिथ्याता, अविद्या और मोक्ष का निरूपण किया गया है, और साथ ही सांख्य, योग तथा अन्य मतों का खंडन-मंडन है। इसी ग्रंथ पर आगे भामती आदि अनेक टीकाएँ लिखी गईं, जिससे यह अद्वैत परंपरा की नींव बना।

प्रसिद्ध कथन

अथातो ब्रह्मजिज्ञासा। (ब्रह्मसूत्र १.१.१)
जन्माद्यस्य यतः। (ब्रह्मसूत्र १.१.२)

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स्रोत: ब्रह्मसूत्र भाष्य