स्मृति
शब्दावली
अन्य नाम: स्मृति, स्मृतिग्रंथ, धर्मशास्त्र
स्मृति का अर्थ है स्मरण किया गया। श्रुति (वेद) के पश्चात् ऋषियों द्वारा रचित धर्म-व्यवस्था के ग्रंथ स्मृति कहलाते हैं।
शास्त्रीय आधार: प्रमुख स्मृतियाँ हैं — मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, विष्णु स्मृति, पराशर स्मृति और नारद स्मृति आदि। स्मृतियों में वर्ण-आश्रम-धर्म, राजधर्म, दंड-विधान, श्राद्ध और प्रायश्चित्त के नियम हैं।
विस्तृत अर्थ: धर्म-निर्णय के चार प्रमाण माने जाते हैं — श्रुति, स्मृति, सदाचार और आत्मसंतोष। श्रुति और स्मृति में विरोध होने पर श्रुति प्रबल मानी जाती है। स्मृतियाँ देश-काल के अनुसार बदलती भी रहीं।
उदाहरण: मनुस्मृति में राजधर्म और वर्ण-धर्म विस्तार से हैं; याज्ञवल्क्य स्मृति में व्यवहार (व्यवसाय) और दायभाग के नियम हैं।
प्रसिद्ध कथन
'श्रुतिस्मृतिपुराणादि धर्मशास्त्रम्' — श्रुति, स्मृति और पुराण धर्मशास्त्र हैं। (भावानुवाद)
'धर्मो रक्षति रक्षितः' — रक्षित धर्म रक्षा करता है। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, नारद स्मृति