संजय
महाभारत
अन्य नाम: संजय सूत
संजय हस्तिनापुर के सूत और राजा धृतराष्ट्र के विश्वस्त सारथी तथा मंत्री थे। वे गावल्गण के पुत्र थे और अपनी बुद्धिमत्ता तथा निष्पक्षता के लिए जाने जाते थे।
वेदव्यास की कृपा से संजय को दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई, जिससे वे हस्तिनापुर में बैठे-बैठे कुरुक्षेत्र में हो रहे युद्ध का प्रत्यक्ष वर्णन कर सके। धृतराष्ट्र की जिज्ञासा पर उन्होंने भीष्म पर्व से लेकर युद्ध के समापन तक की घटनाएँ विस्तार से सुनाईं।
महाभारत का प्रमुख आख्यान संजय के ही मुख से धृतराष्ट्र को सुनाया गया है; भगवद्गीता का उपदेश भी संजय ने ही धृतराष्ट्र को सुनाया। संजय नीति, धर्म और विवेक के संतुलित दृष्टा के रूप में महाभारत के कथानक की रीढ़ हैं।
नाते-रिश्ते
- पिता: गावल्गण
- स्वामी: धृतराष्ट्र
- सारथी: धृतराष्ट्र
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स्रोत: महाभारत – भीष्म पर्व