सात्यकि
महाभारत
अन्य नाम: युयुधान, शैनेय
सात्यकि, जिन्हें युयुधान भी कहा जाता है, वृष्णि कुल के यादव वीर थे। वे शिनि के पौत्र थे, इसलिए शैनेय कहलाए। सात्यकि अर्जुन के घनिष्ठ मित्र और शिष्य थे तथा उन्हें धनुर्विद्या में अर्जुन के समकक्ष माना जाता था।
कुरुक्षेत्र युद्ध में सात्यकि पांडव पक्ष के प्रमुख महारथियों में थे। उन्होंने अनेक कौरव वीरों को पराजित किया और द्रोण पर्व में भूरिश्रवा का वध किया। युद्ध के अंतिम दिनों में भी वे अग्रणी रहे।
सौप्तिक पर्व में अश्वत्थामा के रात्रि-आक्रमण में सात्यकि वीरगति को प्राप्त हुए। सात्यकि यादव-बल और अर्जुन-भक्ति का प्रतीक हैं।
नाते-रिश्ते
- पितामह: शिनि
- मित्र: अर्जुन
- सखा: कृष्ण
- स्वामी: कृष्ण
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स्रोत: महाभारत – द्रोण पर्व, सौप्तिक पर्व