युयुत्सु
महाभारत
युयुत्सु धृतराष्ट्र के पुत्र थे, जिनका जन्म धृतराष्ट्र की वैश्य जाति की स्त्री सुघदा (सुगदा) से हुआ था। इस कारण वे कौरव भाइयों में एक भिन्न कोटि के पुत्र माने गए, पर धृतराष्ट्र के पुत्र ही थे।
द्यूत-सभा में जब द्रौपदी का अपमान हो रहा था, तब युयुत्सु ने भी असंतोष प्रकट किया और धृतराष्ट्र से अनुरोध किया कि वे इस अन्याय को रोकें। जब युद्ध आरंभ हुआ, तब युयुत्सु ने धर्म के पक्ष में खड़े होकर पांडवों की ओर से युद्ध करने का निर्णय लिया।
वे कौरव-पुत्रों में एकमात्र थे जो युद्ध में बच गए। युयुत्सु धर्म के प्रति निष्ठा को कुल-मोह से ऊपर रखने वाले पात्र हैं।
नाते-रिश्ते
- पिता: धृतराष्ट्र
- माता: सुघदा
- भाई: दुर्योधन
- स्वामी: युधिष्ठिर
प्रसिद्ध कथन
यह अधर्म है; धर्म की रक्षा के लिए मैं पांडवों के पक्ष में खड़ा हूँ। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: महाभारत – सभा पर्व, भीष्म पर्व