पितृलोक
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: पितृपुर, पितृगण-लोक
पितृलोक पितरों अर्थात पूर्वजों का निवास-स्थान है। यहाँ मृत पूर्वज अपने कर्मों के अनुसार सुख भोगते हैं और उनकी संतान से श्राद्ध तथा तर्पण की अपेक्षा रखते हैं।
पुराणों और स्मृतियों में पितृलोक को दक्षिण दिशा में, यम के अधीन बताया गया है। पितरों को अग्निष्वात्त तथा बर्हिषद जैसे वर्गों में बाँटा गया है। श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण से पितरों को पितृलोक में तृप्ति मिलती है।
पितृलोक का संबंध पितर, यम, श्राद्ध और मृत्यु से है। यह यमलोक का ही एक भाग माना जाता है और हिंदू धर्म में पितृ-ऋण चुकाने का महत्व इसी से जुड़ा है।
प्रसिद्ध कथन
हे सोम्य पितरो, आप ऊपर, मध्य और नीचे से उदित हों; जो ऋतज्ञ पितर अवृका होकर गए हैं, वे हमारे हवन में रक्षा करें। (भावानुवाद – ऋग्वेद)
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स्रोत: गरुड़ पुराण