पैंगल उपनिषद
ग्रंथ
अन्य नाम: पैंगलोपनिषद्
रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय / परंपरा-प्रसिद्ध
पैंगल उपनिषद याज्ञवल्क्य और उनके शिष्य पैंगल के संवाद के रूप में है। इसमें सांख्य और वेदांत दोनों के विचारों का सुंदर समन्वय मिलता है।
यह उपनिषद यजुर्वेद से जुड़ा है; इसका छोटा पाठ अथर्ववेद और बड़ा पाठ शुक्ल यजुर्वेद से जुड़ा माना जाता है। इसमें आत्मा की चार अवस्थाओं और पंचीकरण का वर्णन है।
इसका मुख्य सिद्धांत है कि जीव और ब्रह्म मूलतः एक हैं और पंचीकरण से बना यह शरीर ब्रह्म से भिन्न नहीं। इसमें श्रवण, मनन और निदिध्यासन पर बल दिया गया है। प्रसिद्ध भाव है — आत्मा और ब्रह्म एक ही हैं। (भावानुवाद)
प्रसिद्ध कथन
जीव और ब्रह्म एक ही हैं। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: यजुर्वेद