याज्ञवल्क्य स्मृति
ग्रंथ
अन्य नाम: याज्ञवल्क्यस्मृति, याज्ञवल्क्य संहिता
रचयिता / कर्ता: याज्ञवल्क्य
याज्ञवल्क्य स्मृति धर्मशास्त्रों में मनुस्मृति के बाद अत्यंत प्रतिष्ठित स्मृति है। इसके प्रणेता महर्षि याज्ञवल्क्य माने जाते हैं, जो वैदिक ऋषि तथा ज्ञान-परंपरा के प्रमुख आचार्य थे।
ग्रंथ तीन अध्यायों में विभाजित है — आचार, व्यवहार और प्रायश्चित्त। आचार में संस्कार, वर्णाश्रम-धर्म तथा कर्तव्य; व्यवहार में न्याय, दाय, ऋण तथा साक्ष्य आदि विवाद; और प्रायश्चित्त में पाप-निवारण की विधियाँ हैं।
यह अपने व्यवस्थित और संक्षिप्त विधान के कारण बहुत लोकप्रिय हुई और इस पर अनेक टीकाएँ — विशेष रूप से मिताक्षरा — लिखी गईं। यही टीका भारत में व्यवहार-धर्म का आधार बनी।
महात्मा: धर्मशास्त्र तथा हिंदू न्याय-परंपरा में इसका अत्यंत महत्त्व है; मिताक्षरा-टीका के कारण यह व्यावहारिक धर्मशास्त्र का प्रमुख ग्रंथ बना।
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स्रोत: याज्ञवल्क्य स्मृति