शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

वज्रसूचिका उपनिषद

ग्रंथ

अन्य नाम: वज्रसूचि उपनिषद, वज्रसूचिकोपनिषद्

रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय / परंपरा-प्रसिद्ध

उपनिषदवेदांतजाति

वज्रसूचिका उपनिषद समाज और जाति पर एक तीखा प्रश्न उठाने वाला उपनिषद है। इसमें पूछा गया है — ब्राह्मण कौन है? और उत्तर दिया गया है कि जन्म से कोई ब्राह्मण नहीं होता।

यह उपनिषद सामवेद से जुड़ा है। इसका नाम वज्रसूचि अर्थात् वज्र जैसी नुकीली सुई से आया है, जो भेद करती है। यह जाति-भेद पर आधारित अंधविश्वास को चुनौती देता है।

इसका मुख्य सिद्धांत है कि कर्म और ज्ञान से ही ब्राह्मणत्व निर्धारित होता है, जन्म या वंश से नहीं। जो ब्रह्म को जानता है, वही सच्चा ब्राह्मण है। प्रसिद्ध भाव है — जाति से कोई ब्राह्मण नहीं होता; ज्ञान और चरित्र से ब्राह्मण होता है। (भावानुवाद)

प्रसिद्ध कथन

जाति से कोई ब्राह्मण नहीं होता; जो ब्रह्म को जाने वही ब्राह्मण है। (भावानुवाद)

संबंधित

ऐतरेय ब्राह्मणकर्मआत्माउपनिषदवेदांत

स्रोत: सामवेद