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मुंडकोपनिषद 3.1.6

रोज़ का श्लोक

अन्य नाम: सत्यमेव जयते

सत्यदेवयानउपनिषद

अर्थ — सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं। सत्य से ही देवयान मार्ग फैला हुआ है, जिस पर आप्तकाम ऋषिगण चलते हैं और जहाँ सत्य का परम निधान है।

यह मंत्र भारत के राष्ट्रीय आदर्श-वाक्य सत्यमेव जयते का स्रोत है। यह सत्य की अंतिम विजय और असत्य के नाश का शाश्वत संदेश देता है।

श्लोक

सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः। येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥

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स्रोत: मुंडकोपनिषद