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छांदोग्य उपनिषद 3.14.1

रोज़ का श्लोक

अन्य नाम: सर्वं खल्विदं ब्रह्म

ब्रह्ममहावाक्यउपासना

अर्थ — यह सब कुछ ब्रह्म ही है। जिससे सब उत्पन्न होते हैं, जिसमें सब लीन होते हैं और जिसमें सब जीवित रहते हैं — उसी की शांत भाव से उपासना करनी चाहिए।

यह छांदोग्य उपनिषद का महावाक्य है जो सर्वं ब्रह्ममय होने का बोध कराता है। इसी भाव से उपासना करने वाला शांति को प्राप्त होता है।

श्लोक

सर्वं खल्विदं ब्रह्म तज्जलानिति शान्त उपासीत।

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स्रोत: छांदोग्य उपनिषद