मनुस्मृति
ग्रंथ
अन्य नाम: मानवधर्मशास्त्र, मनुसंहिता
रचयिता / कर्ता: मनु
मनुस्मृति (मानवधर्मशास्त्र) हिंदू धर्मशास्त्रों में सर्वाधिक प्राचीन और प्रतिष्ठित स्मृति है। इसके प्रणेता मनु माने जाते हैं, जो परंपरा में मानव-वंश के आदि विधाता हैं।
ग्रंथ बारह अध्यायों में विभाजित है और इसमें लगभग 2694 श्लोक माने जाते हैं। मुख्य विषय — सृष्टि-वर्णन, संस्कार, वर्णाश्रम-धर्म, विद्यार्थी और गृहस्थ के कर्तव्य, राजधर्म, व्यवहार (न्याय), दान, शौच तथा प्रायश्चित्त हैं।
इसमें चारों वर्णों के कर्तव्य, आश्रम-धर्म, विवाह, दाय-भाग, अपराध और दंड-विधि तथा मोक्ष-धर्म का विस्तृत वर्णन है। यह धर्म-शास्त्र का आदि स्रोत माना जाता है।
महात्मा: भारतीय समाज-व्यवस्था, न्याय और धर्म-विधान पर इसका गहरा प्रभाव रहा है। परंपरा इसे स्मृति साहित्य का आधार मानती है।
प्रसिद्ध कथन
धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्॥ (६.९२)
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स्रोत: मनुस्मृति