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हरिवंश पुराण

ग्रंथ

अन्य नाम: हरिवंश, हरिवंशम्

रचयिता / कर्ता: वेदव्यास

इतिहासकृष्णमहाभारतवंश

हरिवंश पुराण महाभारत का परिशिष्ट ग्रंथ है और इसे वेदव्यास कृत माना जाता है। परंपरा में इसे 'खिल' (परिशिष्ट) तथा कहीं-कहीं उन्नीसवाँ पुराण भी कहा जाता है।

ग्रंथ तीन भागों में विभाजित है — हरिवंश पर्व, विष्णु पर्व और भविष्य पर्व। मुख्य विषय श्रीकृष्ण की वंशावली (यदुवंश), उनका जन्म, बाल-लीलाएँ तथा यादव-वंश की कथाएँ हैं।

इसमें श्रीकृष्ण की मथुरा-द्वारका लीलाएँ, अनेक यादव-वंशीय कथाएँ तथा वंश-वर्णन है। यह महाभारत-काल से पूर्व की कृष्ण-कथाओं का महत्त्वपूर्ण स्रोत है।

महात्मा: यह ग्रंथ श्रीकृष्ण-चरित्र तथा यदुवंश-इतिहास का प्राचीन स्रोत है और महाभारत तथा भागवत के बीच की कड़ी माना जाता है।

प्रसिद्ध कथन

नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्। देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥ (प्रारंभ)

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स्रोत: हरिवंश पुराण