मंथरा
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: मंथरा, कुब्जा
मंथरा कैकेयी की दासी थी; वह कुब्जा (कुबड़ी) थी और केकय से कैकेयी के साथ अयोध्या आई थी।
जब राम के राज्याभिषेक का समाचार मिला, तो मंथरा ने ईर्ष्यापूर्ण तर्कों से कैकेयी को भड़काया — कि राम के राजा बनने पर भरत और कैकेयी की उपेक्षा होगी।
इसी प्रेरणा से कैकेयी ने वरदान माँगे। मंथरा रामायण की कथा-योजना में षड्यंत्र का प्रमुख बीज मानी जाती है; लोक-परंपरा में वह कलह की प्रतिमूर्ति है।
नाते-रिश्ते
- दासी: कैकेयी
- सहचरी: कैकेयी
प्रसिद्ध कथन
कैकेयी से: "यदि राम राजा बने तो तुम्हारा और भरत का कोई स्थान नहीं रहेगा।" (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अयोध्याकाण्ड; रामचरितमानस – अयोध्याकाण्ड