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जनक

रामायण एवं रामचरितमानस

अन्य नाम: सीरध्वज जनक, राजर्षि जनक, विदेह नरेश, मिथिलाधिपति

मिथिलाराजर्षिसीतापिताकर्मयोगी

जनक विदेह (मिथिला) के राजा थे; उन्हें सीरध्वज तथा राजर्षि जनक कहा जाता है। वे सीता और उर्मिला के पिता तथा कुशध्वज के भाई थे।

यज्ञ-भूमि जोतते समय हल से सीता की प्राप्ति हुई; इसी कारण सीता 'जानकी' और 'भूमिजा' कहलाईं। उनके दरबार में शिव-धनुष रखा था, जिसे तोड़ने पर सीता का विवाह राम से हुआ।

जनक 'राजर्षि' थे — राज्य करते हुए भी विरक्त और ज्ञानी। भगवद्गीता में कर्मयोग के उदाहरण-रूप में जनक का नाम आता है — 'कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः'। वे ब्रह्म-ज्ञान में स्थित गृहस्थ राजा के आदर्श हैं।

नाते-रिश्ते

  • पुत्री: सीता, उर्मिला
  • पत्नी: सुनयना
  • भाई: कुशध्वज

प्रसिद्ध कथन

स्वयंवर में: "जो शिव-धनुष उठाकर तोड़ेगा, वही मेरी पुत्री सीता का वर होगा।" (भावानुवाद)
ज्ञान-वैराग्य में स्थित राजर्षि के रूप में जनक का उपदेश। (भावानुवाद)

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सीताश्रीरामउर्मिलाकर्मभगवद्गीता

स्रोत: वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड; भगवद्गीता – अध्याय ३