शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

महाभारत (ग्रंथ)

ग्रंथ

अन्य नाम: महाभारत, भारत, जय, पंचम वेद

रचयिता / कर्ता: वेदव्यास

इतिहासमहाकाव्यकुरुवंशधर्म

महाभारत वेदव्यास द्वारा रचित प्राचीन भारत का महाकाव्य और इतिहास-ग्रंथ है। इसमें कुरुवंश के कौरवों और पांडवों के संघर्ष तथा कुरुक्षेत्र युद्ध की कथा है।

परंपरा के अनुसार इसकी रचना वेदव्यास ने की और इसे गणेश जी ने लिखा। इसमें लगभग एक लाख श्लोक हैं, इसलिए इसे 'शतसहस्रिका संहिता' कहा जाता है। मूल नाम 'जय' और 'भारत' से यह 'महाभारत' बना।

यह 18 पर्वों में विभाजित है — आदि पर्व से स्वर्गारोहण पर्व तक। इसमें कथा के साथ धर्म, नीति, दर्शन और उपदेश संकलित हैं, जिनमें भगवद्गीता सबसे प्रसिद्ध है।

महाभारत को 'पंचम वेद' और 'इतिहास' कहा जाता है। इसमें जीवन के हर पक्ष — राजधर्म, मोक्षधर्म, नीति और भक्ति — का समावेश है। वैशंपायन-सूत ने इसका कथन जनमेजय के सर्प-यज्ञ में किया।

प्रसिद्ध कथन

धर्मे चार्थे च कामे च मोक्षे च भरतर्षभ। यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहास्ति न तत्क्वचित्॥ (महाभारत 1.56.33) — भाव: 'धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के विषय में जो इस ग्रंथ में है वह अन्यत्र भी है; जो यहाँ नहीं है वह कहीं नहीं।'

संबंधित

वेदव्यासश्रीकृष्णअर्जुनयुधिष्ठिरकुरुक्षेत्र युद्धधर्म

स्रोत: महाभारत (वेदव्यास; वैशंपायन-सूत द्वारा कथन)