अर्थशास्त्र (उपवेद)
ग्रंथ
अन्य नाम: अर्थशास्त्र, कौटिलीय अर्थशास्त्र, चाणक्य अर्थशास्त्र
रचयिता / कर्ता: कौटिल्य (चाणक्य)
अर्थशास्त्र कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा रचित राजनीति, अर्थव्यवस्था और शासन-प्रबंधन का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसे उपवेद की कोटि में रखा जाता है।
इसमें 15 अधिकरण हैं, जिनमें राजा के कर्तव्य, मंत्रिपरिषद, दंडनीति, युद्ध-नीति, कर-व्यवस्था, न्याय और गुप्तचर-व्यवस्था जैसे विषय हैं।
कौटिल्य मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त के मंत्री थे और इस ग्रंथ की रचना लगभग चौथी शताब्दी ईसा-पूर्व में मानी जाती है। यह 'राजनीति का आदि ग्रंथ' कहलाता है।
अर्थशास्त्र में राज्य के सात अंग (सप्तांग) और 'मत्स्यन्याय' जैसी अवधारणाएँ प्रसिद्ध हैं। यह प्राचीन भारत की शासन और अर्थ-व्यवस्था का महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
प्रसिद्ध कथन
प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम् (अर्थशास्त्र 1.19) — भाव: 'प्रजा के सुख में राजा का सुख है और प्रजा के हित में राजा का हित है।'
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स्रोत: कौटिलीय अर्थशास्त्र