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त्रिवेणी संगम

तीर्थ एवं स्थान

अन्य नाम: त्रिवेणी संगम, प्रयाग संगम

प्रयागराजगंगायमुना

त्रिवेणी संगम का अर्थ है तीन नदियों का मिलन। सर्वप्रमुख त्रिवेणी संगम प्रयागराज में है, जहाँ गंगा और यमुना मिलती हैं और तीसरी — सरस्वती — अदृश्य रूप में इसमें समाहित मानी जाती है। इसी संगम पर प्रयागराज (इलाहाबाद) बसा है।

कथा/महात्व: सरस्वती को वेदों की नदी कहा गया; माना जाता है कि वह यहाँ भूमिगत या अदृश्य रूप में मिलती है। संगम-स्नान को 'माघ स्नान' और कुंभ में विशेष महत्व दिया गया है; माघ मास में यहाँ कल्पवास करना पुण्यकारी माना जाता है। त्रिवेणी संगम को 'तीर्थराज' प्रयाग का हृदय कहा जाता है।

अन्य त्रिवेणी संगम भी हैं — जैसे काशी के पास गंगा-वरुणा-अस्सी, हरिद्वार के पास गंगा-बिंदु-सरस्वती आदि। पर सामान्यतः 'त्रिवेणी' शब्द प्रयाग के संगम के लिए प्रयुक्त होता है।

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प्रयागराजगंगासरस्वतीकुंभ मेला

स्रोत: स्कन्द पुराण; पुराण-परंपरा