कूष्मांडा
देवी एवं उपासना
अन्य नाम: कूष्माण्डा
कूष्मांडा नवदुर्गा का चतुर्थ स्वरूप हैं। मान्यता है कि इन्होंने अपनी मंद मुस्कान से इस ब्रह्मांड की रचना की, इसी से इन्हें सृष्टि की आदि शक्ति माना जाता है। ये सिंह पर आरूढ़ होती हैं और आठ भुजाओं में शस्त्र तथा कमल धारण करती हैं।
इनका वर्णन नवदुर्गा परंपरा और नवदुर्गा स्तोत्र में मिलता है; नामावली में ये 'कूष्माण्डेति चतुर्थकम्' कहलाती हैं।
नवरात्रि के चतुर्थ दिन इनकी पूजा होती है। मालपुआ का भोग अर्पित किया जाता है और 'ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः' मंत्र का जप किया जाता है। इनकी उपासना से आयु, आरोग्य और ऊर्जा की प्राप्ति मानी जाती है।
प्रसिद्ध कथन
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
संबंधित
स्रोत: देवी भागवत पुराण / नवदुर्गा परंपरा