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चंद्रघंटा

देवी एवं उपासना

अन्य नाम: चन्द्रघण्टा

नवदुर्गादुर्गानवरात्रिशक्ति

चंद्रघंटा नवदुर्गा का तृतीय स्वरूप हैं। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटे के आकार में सुशोभित रहता है, इसी से इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। ये सिंह पर आरूढ़ होती हैं और अनेक शस्त्र धारण करती हैं। इनका स्वरूप वीरता और शांति का मेल है।

इनका वर्णन नवदुर्गा परंपरा और नवदुर्गा स्तोत्र में मिलता है; नामावली में ये 'तृतीयं चन्द्रघण्टेति' कहलाती हैं।

नवरात्रि के तृतीय दिन इनकी पूजा होती है। दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है और 'ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः' मंत्र का जप किया जाता है। इनकी उपासना से साहस बढ़ता है और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।

प्रसिद्ध कथन

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

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स्रोत: देवी भागवत पुराण / नवदुर्गा परंपरा