कुंभ मेला
तीर्थ एवं स्थान
अन्य नाम: कुंभ मेला, कुंभ
कुंभ मेला हिंदुओं का विशाल तीर्थ-समागम है, जो चार स्थानों पर बारह वर्ष के अंतराल पर बारी-बारी लगता है — प्रयागराज (गंगा-यमुना-सरस्वती संगम), हरिद्वार (गंगा), उज्जैन (शिप्रा) और नासिक-त्र्यंबकेश्वर (गोदावरी)। छह वर्ष पर हरिद्वार और प्रयाग में अर्द्धकुंभ लगता है; नासिक-उज्जैन का कुंभ 'सिंहस्थ' कहलाता है।
कथा: समुद्र मंथन से अमृत-कलश निकला। माना जाता है कि मोहिनी/देवताओं के साथ अमृत-कलश ले जाते समय अमृत की बूँदें इन चार स्थानों पर गिरीं। कलश (कुंभ) की यात्रा बारह दिव्य दिनों की थी, जो बारह मानव वर्षों के बराबर माने गए — इसीलिए कुंभ हर बारह वर्ष पर होता है।
महात्व: कुंभ में स्नान को पाप-नाश और मोक्ष का साधन माना जाता है। स्नान का आरंभ अखाड़ों के साधु-संतों के 'शाही स्नान' से होता है। यह संसार का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण समागम माना जाता है और युनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में सम्मिलित है।
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समुद्र मंथनप्रयागराजहरिद्वारउज्जैनत्र्यंबकेश्वरत्रिवेणी संगम
स्रोत: पुराण-परंपरा (समुद्र मंथन प्रसंग)