किष्किंधाकांड
ग्रंथ
अन्य नाम: किष्किंधा कांड
रचयिता / कर्ता: वाल्मीकि
किष्किंधाकांड वाल्मीकि रामायण का चौथा कांड है। इसमें श्रीराम का किष्किंधा पहुँचना, हनुमान से भेंट, सुग्रीव से मित्रता और वालि-वध का वर्णन है। सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य तथा अंगद को युवराज-पद मिला।
मुख्य विषय सीता की खोज है। वर्षा-काल के बाद सुग्रीव ने चारों दिशाओं में वानर-सेना भेजी। हनुमान, अंगद आदि दक्षिण दिशा में गए। संपाति से सूचना मिली और हनुमान ने समुद्र लाँघकर लंका का मार्ग चुना।
इस कांड का महत्त्व राम-सुग्रीव की मित्रता, वालि-वध के समय श्रीराम की धर्म-निष्ठा तथा हनुमान की सेवा-भावना में है।
महात्मा: यह कांड कार्य-सिद्धि के लिए मित्रता, संगठन और शक्ति के सदुपयोग की प्रेरणा देता है।
प्रसिद्ध कथन
श्रीराम ने सुग्रीव से मित्रता की और वालि-वध के पश्चात् किष्किंधा का राज्य सुग्रीव को सौंपा। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण, किष्किंधाकांड