ज्ञानेश्वरी
ग्रंथ
अन्य नाम: भावार्थदीपिका, ज्ञानेश्वरी भाष्य
रचयिता / कर्ता: ज्ञानेश्वर
यह भगवद्गीता पर संत ज्ञानेश्वर द्वारा रचित भाष्य है, जिसे ज्ञानेश्वरी तथा भावार्थदीपिका कहा जाता है। यह मराठी भाषा में ओवी छंदों में लिखी गई है।
ज्ञानेश्वर महाराष्ट्र की वारकरी (भागवत) परंपरा और नाथ संप्रदाय से जुड़े संत थे। उन्होंने लगभग तेरहवीं शताब्दी में यह ग्रंथ रचा।
ज्ञानेश्वरी में ज्ञान, कर्म और भक्ति का सुंदर समन्वय है, और गीता के भावों को सरल भाषा तथा दृष्टांतों द्वारा जन-जन तक पहुँचाया गया है। यह मराठी साहित्य और भक्ति आंदोलन का आधार-ग्रंथ मानी जाती है।
प्रसिद्ध कथन
(भावानुवाद) ओम्, आदि देवता को नमस्कार, जो वेदों द्वारा प्रतिपादित और स्वसंवेद्य आत्मरूप है — यही ज्ञानेश्वरी का प्रारंभिक मंगलाचरण है।
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स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध