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सायण भाष्य (वेद)

ग्रंथ

अन्य नाम: वेदार्थप्रकाश, माधवीय भाष्य

रचयिता / कर्ता: सायण

वेदमीमांसाभाष्य

यह वेदों पर सायणाचार्य द्वारा रचित प्रसिद्ध भाष्य है, जिसे वेदार्थप्रकाश (माधवीय भाष्य) कहा जाता है। इसमें ऋग्वेद तथा अन्य वेदों की व्याख्या सम्मिलित है।

सायणाचार्य चौदहवीं शताब्दी के मीमांसा विद्वान् थे और विजयनगर साम्राज्य के मंत्री रहे। उन्होंने वेद के प्रायः सभी भागों पर भाष्य लिखा।

इस भाष्य में वेद-मंत्रों का अर्थ यज्ञ-कर्म तथा उसके अनुष्ठान के संदर्भ में समझाया गया है। सायण-भाष्य वेद-व्याख्या की परंपरा का सबसे विस्तृत और प्रामाणिक ग्रंथ माना जाता है, जिसका प्रयोग पाश्चात्य विद्वानों ने भी किया।

प्रसिद्ध कथन

अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्। होतारं रत्नधातमम्॥ (ऋग्वेद १.१.१)
(भावानुवाद) वेद-मंत्रों का प्रधान प्रयोजन यज्ञ-कर्म का अनुष्ठान है।

संबंधित

ऋग्वेदमहीधर वेददीपभट्ट भास्करउपनिषद

स्रोत: वेदार्थप्रकाश