घटोत्कच
महाभारत
अन्य नाम: भीमपुत्र, हिडिंबानंदन, राक्षसराज
घटोत्कच भीम और हिडिंबा राक्षसी के पुत्र थे। जन्म लेते ही उनका शरीर घट के समान विशाल था, इसीलिए उन्हें ‘घटोत्कच’ कहा गया। वनवास के समय भीम की हिडिंबा से भेंट हुई थी और घटोत्कच हिडिंब राक्षस-कुल में बड़ा हुआ। वे अपनी माया-शक्ति, विशाल बल और उड़ने की क्षमता के लिए जाने जाते थे।
पांडवों के वनवास तथा अन्य अवसरों पर उन्होंने अनेक बार सहायता की। कुरुक्षेत्र युद्ध में वे पांडवों के पक्ष में सम्मिलित हुए और अपनी माया से कौरव-सेना में भीषण संहार किया। कौरव-सेना की रक्षा के लिए विवश होकर कर्ण ने इंद्र से प्राप्त अपना एकमात्र शक्ति-अस्त्र घटोत्कच पर प्रयोग किया।
उस अस्त्र के प्रभाव से घटोत्कच वीरगति को प्राप्त हुए। कृष्ण ने यह भली-भाँति जानते हुए कि शक्ति-अस्त्र एक ही बार चलेगा, कर्ण को उसका प्रयोग घटोत्कच पर करने के लिए विवश किया, जिससे अर्जुन की रक्षा हुई। घटोत्कच का उत्सर्ग पांडवों की विजय का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
नाते-रिश्ते
- पिता: भीम, माता: हिडिंबा
- पत्नी: मौरवी
- पुत्र: बर्बरीक
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: महाभारत – आदि पर्व; द्रोण पर्व