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गौड़ीय (चैतन्य) सम्प्रदाय

सम्प्रदाय एवं मठ

अन्य नाम: चैतन्य सम्प्रदाय, ब्रह्म-माध्व-गौड़ीय सम्प्रदाय

कृष्णराधाचैतन्यसंकीर्तन

गौड़ीय सम्प्रदाय कृष्ण भक्ति की वह परंपरा है जिसका प्रचार चैतन्य महाप्रभु ने किया। इसमें राधा-कृष्ण की युगल उपासना की जाती है। इसका सिद्धांत अचिन्त्य भेदाभेद है। इसके इष्टदेव राधा-कृष्ण हैं।

चैतन्य महाप्रभु (1486-1534) बंगाल के नवद्वीप (नदिया) में जन्मे थे। उन्होंने संकीर्तन तथा हरिनाम का प्रचार किया। प्रमुख स्थल मायापुर, वृंदावन तथा जगन्नाथ पुरी हैं।

चैतन्य महाप्रभु को राधा तथा कृष्ण का संयुक्त अवतार माना जाता है। उनके अनुयायियों में छह गोस्वामी प्रमुख थे, जिन्होंने वृंदावन में भक्ति ग्रंथों की रचना की। यह सम्प्रदाय आज भारत तथा विदेशों में भी विस्तृत है।

प्रसिद्ध कथन

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥

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स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध