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गणपति अथर्वशीर्ष

ग्रंथ

अन्य नाम: गणपति उपनिषद, गणेश अथर्वशीर्ष, अथर्वशीर्ष उपनिषद

रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय / परंपरा-प्रसिद्ध

उपनिषदगाणपत्यअथर्ववेद

गणपति अथर्वशीर्ष गणपति को परब्रह्म बताने वाला अथर्ववेदीय स्तोत्र-उपनिषद है। इसमें गणपति की स्तुति और उनका मंत्र-स्वरूप बताया गया है।

यह अथर्ववेद से जुड़ा है और इसके ऋषि गणक माने जाते हैं। इसमें गणपति गायत्री और ॐ गं गणपतये नमः मंत्र प्रसिद्ध हैं।

इसका मुख्य सिद्धांत है कि गणपति ही समस्त जगत के कर्ता, धर्ता और संहर्ता तथा सच्चिदानंद ब्रह्म हैं। प्रसिद्ध वाक्य है — त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि, अर्थात् तुम ही प्रत्यक्ष तत्त्व हो।

प्रसिद्ध कथन

त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि । त्वमेव केवलं कर्तासि ।
एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥

संबंधित

गणेशब्रह्मॐमंत्रउपनिषद

स्रोत: अथर्ववेद