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देवलोक

वेद एवं पुराण

अन्य नाम: सुरलोक, देवपुर

लोकस्वर्गदेवतापुराण

देवलोक का अर्थ है देवताओं का निवास-लोक। यह स्वर्ग का ही विस्तृत रूप माना जाता है, जहाँ इंद्र, अग्नि, वरुण और कुबेर आदि देवता निवास करते हैं। यहाँ जरा, दुःख और मृत्यु का अभाव बताया गया है तथा केवल पुण्य-कर्मों के फल का भोग होता है।

पुराणों में देवलोक को मेरु पर्वत के ऊपर स्थित कहा गया है। इसमें इंद्र की राजधानी अमरावती, सुधर्मा सभा, नंदन वन, पारिजात वृक्ष और कामधेनु का वर्णन मिलता है। विष्णु पुराण तथा भागवत पुराण के अनुसार देवलोक स्वर्ग-लोक के भीतर ही आता है और यहाँ पुण्य क्षीण होने पर जीव को पुनः मृत्युलोक में जन्म लेना पड़ता है।

देवलोक हिंदू कल्पना में पुण्य-कर्मों के फल-भोग का स्थान है। यह सप्तलोक के स्वर्लोक से जुड़ा है तथा यमलोक और पितृलोक से भिन्न है। इसका संबंध इंद्र, स्वर्ग और सप्तलोक से सीधा है।

प्रसिद्ध कथन

स्वर्ग-लोक में इंद्र की अमरावती नगरी है, जहाँ सुधर्मा सभा और नंदन वन शोभा पाते हैं। (भावानुवाद – भागवत पुराण)

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स्वर्गइंद्रसप्तलोकवैकुंठ

स्रोत: भागवत पुराण