भट्ट भास्कर
ग्रंथ
अन्य नाम: भास्कर भाष्य, तैत्तिरीय भाष्य
रचयिता / कर्ता: भट्ट भास्कर मिश्र
यह कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता पर भट्ट भास्कर मिश्र द्वारा रचित भाष्य है।
भट्ट भास्कर मिश्र वेद-व्याख्या के प्राचीन आचार्यों में से हैं। उनका भाष्य तैत्तिरीय संहिता की व्याख्या की परंपरा में सायण के भाष्य से भी पहले का माना जाता है।
इस भाष्य में संहिता के मंत्रों की व्याकरण, निरुक्त और यज्ञ-प्रयोग के आधार पर व्याख्या की गई है। यह कृष्ण यजुर्वेद की व्याख्या का महत्वपूर्ण और प्राचीन ग्रंथ है, जिसका उपयोग सायण-भाष्य के साथ मिलाकर किया जाता है।
प्रसिद्ध कथन
(भावानुवाद) तैत्तिरीय संहिता के मंत्रों का अर्थ व्याकरण, निरुक्त और यज्ञ-प्रयोग के संदर्भ में समझाया गया है।
संबंधित
स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध