महीधर वेददीप
ग्रंथ
अन्य नाम: वेददीप, वेददीप भाष्य
रचयिता / कर्ता: महीधर
यह शुक्ल यजुर्वेद की वाजसनेयी संहिता पर महीधर द्वारा रचित भाष्य है, जिसे वेददीप कहा जाता है।
महीधर सोलहवीं शताब्दी के विद्वान् थे, जो मंत्रमहोदधि जैसे प्रसिद्ध ग्रंथ के रचयिता भी हैं।
वेददीप में वाजसनेयी संहिता के मंत्रों की व्याख्या पद-पद पर की गई है, जिसमें यज्ञ-प्रयोग और मंत्रार्थ दोनों स्पष्ट किए गए हैं। यह शुक्ल यजुर्वेद की व्याख्या का प्रमुख आधार-ग्रंथ है।
प्रसिद्ध कथन
इषे त्वोर्जे त्वा वायव स्थ देवो वः सविता प्रार्पयतु श्रेष्ठतमाय कर्मणे। (शुक्ल यजुर्वेद १.१)
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स्रोत: वेददीप