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बंध

आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग

अन्य नाम: बंध, हठयोग बंध

योगबंधहठयोग

बंध का अर्थ है बाँधना। हठयोग में बंध प्राण को शरीर के विशेष भागों में रोकने की क्रिया है।

हठयोगप्रदीपिका में तीन प्रमुख बंध बताए गए हैं — मूलबंध, उड्डियान बंध तथा जालंधर बंध। इन्हें मुद्राओं के साथ प्राणायाम में प्रयोग किया जाता है।

बंध प्राण-वायु की गति को नियंत्रित करके चित्त की स्थिरता तथा कुंडलिनी-जागरण में सहायक माने जाते हैं।

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मुद्राप्राणायामकुंडलिनीहठयोगप्रदीपिकासुषुम्ना

स्रोत: हठयोगप्रदीपिका