कुंडलिनी
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: कुंडलिनी, कुंडलिनी शक्ति, सर्पिणी शक्ति
कुंडलिनी शरीर में स्थित सूक्ष्म शक्ति है, जिसे सर्प के रूप में कुंडलित माना जाता है। यह मूलाधार चक्र में सुप्त अवस्था में रहती है।
हठयोगप्रदीपिका में कुंडलिनी का वर्णन है, जिसमें इसे सुषुम्ना-मार्ग से ऊर्ध्वगामी करने की विधि बताई गई है। मुद्रा, बंध तथा प्राणायाम इसके साधन हैं।
कुंडलिनी के जागरण से चक्र-भेदन होकर सहस्रार तक पहुँचना माना जाता है, जिससे चेतना का विस्तार होता है। यह योग-साधना की उच्च अवस्था मानी जाती है।
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स्रोत: हठयोगप्रदीपिका