हठयोगप्रदीपिका
ग्रंथ
अन्य नाम: हठप्रदीपिका
रचयिता / कर्ता: स्वात्माराम
हठयोगप्रदीपिका हठयोग का प्रसिद्ध ग्रंथ है, जिसमें आसन, प्राणायाम, मुद्रा और नादानुसंधान की साधना-विधि बताई गई है।
रचयिता स्वात्माराम योगी माने जाते हैं। ग्रंथ में चार अध्याय (उपदेश) हैं और इसमें हठयोग को राजयोग तक पहुँचने का साधन बताया गया है।
विषय आसन, कुंभक, षट्कर्म, मुद्रा और समाधि है। हठयोगप्रदीपिका हठयोग-परंपरा का सर्वाधिक प्रसिद्ध और पढ़ा जाने वाला ग्रंथ माना जाता है।
प्रसिद्ध कथन
हठस्य प्रथमाङ्गत्वादासनं पूर्वमुच्यते। (हठयोगप्रदीपिका, प्रथम उपदेश)
संबंधित
स्रोत: हठयोगप्रदीपिका (स्वात्माराम)