मुद्रा
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: मुद्रा, हठयोग मुद्रा
मुद्रा का अर्थ है मुद्रण या मुहर। हठयोग में मुद्रा वे विशेष क्रियाएँ हैं जिनसे प्राण का नियंत्रण तथा चित्त की स्थिरता होती है।
हठयोगप्रदीपिका में महामुद्रा, महाबंध, खेचरी तथा विपरीतकरणी आदि मुद्राओं का वर्णन है। ये प्राणायाम तथा कुंडलिनी-साधना से जुड़ी हैं।
मुद्राएँ प्राण-शक्ति को स्थिर तथा ऊर्ध्वगामी बनाती हैं। इनसे रोग-नाश और साधना में प्रगति मानी जाती है।
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स्रोत: हठयोगप्रदीपिका