बद्रीनाथ
तीर्थ एवं स्थान
अन्य नाम: बद्रीनाथ, बदरिकाश्रम, बद्री विशाल
बद्रीनाथ उत्तराखंड के चमोली जिले में, हिमालय में नर-नारायण पर्वत के निकट अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। यह आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार धाम में एक है।
कथा है कि यहाँ नर-नारायण ऋषियों ने तप किया; विष्णु यहाँ बदरी (बेर) वृक्ष के नीचे तपस्या में लीन रहे, इसी से 'बद्रीनाथ' नाम पड़ा। एक अन्य कथा में भगवान यहाँ लक्ष्मी के पीछे जाने से रुके।
बद्रीनाथ मंदिर में विष्णु की शालग्राम-प्रतिमा पूजित है। तप्तकुंड तथा नारदकुंड यहाँ के प्रमुख स्थान हैं। हेमंत में मंदिर बंद रहता है और शीतकालीन पूजा जोशीमठ में होती है।
प्रसिद्ध कथन
'बदर्यां नारायणः साक्षात्' — बदरी में स्वयं नारायण विराजमान हैं। (भावानुवाद)
'नर-नारायण-क्षेत्रम्' — नर और नारायण का तपःक्षेत्र। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: विष्णु पुराण, स्कन्द पुराण, महाभारत (वन पर्व)