अवीचि नरक
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: अवीचि
अवीचि नरक अत्यंत भयानक नरकों में से एक है। अवीचि का अर्थ है तरंग-रहित अथवा विश्राम-रहित — जहाँ पापी को क्षण भर भी विश्राम नहीं मिलता।
पुराणों तथा परंपराओं में अवीचि को सबसे कठोर नरकों में गिना जाता है। यहाँ जीव को निरंतर, बिना रुके वेदना सहनी पड़ती है — न मृत्यु आती है, न मुक्ति। जो प्राणी महापाप करते हैं, वे यहाँ गिरते हैं।
अवीचि नरक निरंतर दंड और पाप के भारी फल का प्रतीक है। यह यम के अधीन नरक-भूमि का भाग है। इसका संबंध नरक, यम, चित्रगुप्त और पाताल से है।
प्रसिद्ध कथन
जो प्राणी महापाप करते हैं, वे अवीचि नरक में निरंतर, बिना विश्राम वेदना सहते हैं। (भावानुवाद – गरुड़ पुराण)
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स्रोत: गरुड़ पुराण