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अथर्ववेद संहिता

ग्रंथ

अन्य नाम: अथर्ववेद, अथर्वांगिरस, ब्रह्मवेद

रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय

वेदसंहिताचिकित्सारक्षाश्रुति

अथर्ववेद संहिता चौथा वेद है, जिसका संबंध अथर्वा और अंगिरा ऋषियों की परंपरा से है। इसमें यज्ञ-कर्मकांड के साथ-साथ दैनिक जीवन, स्वास्थ्य, रोग-निवारण और रक्षा से जुड़े मंत्र मिलते हैं।

इसमें लगभग 20 कांड, 730 सूक्त और करीब 5977 मंत्र हैं। इसका विषय बहुत व्यापक है — आयुर्वेद, राजधर्म, ब्रह्मज्ञान, शांति-कर्म और रोग-चिकित्सा तक।

यह भी अपौरुषेय माना जाता है। इस वेद की शौनक तथा पैप्पलाद नामक प्रमुख शाखाएँ रही हैं।

अथर्ववेद को आयुर्वेद का आदि-स्रोत भी माना जाता है, क्योंकि इसमें अनेक औषधीय और चिकित्सा-संबंधी मंत्र हैं। मुण्डक, माण्डूक्य और प्रश्न उपनिषद इससे संबंधित हैं।

प्रसिद्ध कथन

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः। भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः॥ (शांति सूक्त, अथर्ववेद परंपरा)

संबंधित

अथर्ववेदचार वेदआयुर्वेदब्रह्मप्रश्न उपनिषद

स्रोत: अथर्ववेद संहिता (शौनक एवं पैप्पलाद शाखा)